Fri. Apr 10th, 2020

तर्पण पत्रिका

मुखर प्रतिरोध की त्रैमासिकी…

Hindi Kavita

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मज़दूरों के हथौड़ी  ठोंकने की आवाज़, सब्जीवाले की  दाम चीख़ती आवाज़, विश्वविद्यालयों की गूँजती बेक़रार आवाज़, सुबह-सुबह अज़ान और  मुकद्दस...

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आज मैं, वो नही जो पहले था मैं बदल चुका हूं .......... पहले था सीधा साधा, नेकदिल, विश्वासी, संजिदगी भरा...

तुम कहते हो महिला की कोई जाति नहीं होती।  फिर शोषण की कैसे अपनी जाति हो सकती है। तुम कहते...

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     जीवन भर नर्तन किया, फिर ली आंखें मूँद ।    गर्म तवे पर नाचती, ज्यों छन-छन-छन बूँद ।।...

क्या होगा भयानक दृश्य वहां वीरों ने गवाये प्राण जहां कतरा कतरा था खून गिरा थम गया समय ही पल...

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महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी माने जाते है जिन्होंने सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ा कर हमें गुलामी...