Fri. Apr 10th, 2020

तर्पण पत्रिका

मुखर प्रतिरोध की त्रैमासिकी…

कविता

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समय हूँ,समय हूँ मैं मंजिल का मूल्यवान् हूँ। जरा इस बात पर ध्यान दो मेरा- तेरे जीवन की अनोखी क़ीमत...